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लखीसराय में NEET परीक्षा में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 30 गिरफ्तार

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लखीसराय में NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान सॉल्वर गैंग पकड़ा गया। 9 फर्जी परीक्षार्थियों समेत 30 लोग गिरफ्तार, पुलिस नेटवर्क की जांच में जुटी।

लखीसराय/आलम की खबर:NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय जिले में परीक्षा प्रणाली को चुनौती देने वाला बड़ा मामला सामने आया है, जहां सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के बावजूद प्रशासन ने 9 फर्जी परीक्षार्थियों सहित कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है और कई जिलों तक इसके तार जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

परीक्षा केंद्रों पर सख्त निगरानी के बावजूद हुआ खुलासा

जानकारी के अनुसार, NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अभ्यर्थियों की पहचान की जा रही थी। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और फोटो रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहे थे, जिसके बाद अधिकारियों को शक हुआ और गहन जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थी दूसरों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। प्रारंभिक कार्रवाई में केआरके उच्च विद्यालय केंद्र से एक, केंद्रीय विद्यालय केंद्र से सात और हसनपुर विद्यालय केंद्र से एक संदिग्ध परीक्षार्थी को पकड़ा गया। सभी आरोपी दूसरे जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

30 लोग गिरफ्तार, कई स्तरों पर चल रही जांच

एसडीपीओ शिवम कुमार के अनुसार अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 9 लोग सीधे तौर पर फर्जी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दे रहे थे, जबकि बाकी लोग इस पूरे सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े हुए पाए गए हैं। सभी से लगातार पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल लखीसराय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।

बायोमेट्रिक सिस्टम की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी कड़ी निगरानी और बायोमेट्रिक सिस्टम के बावजूद फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंच गए। इसके लिए संबंधित एजेंसियों और तकनीकी सिस्टम की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।

देशभर में हुई थी सख्त सुरक्षा व्यवस्था

गौरतलब है कि NEET UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को देशभर के 564 शहरों में आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान सुरक्षा के लिए दो लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, 6,669 ऑब्जर्वर और 674 सिटी कोऑर्डिनेटर तैनात किए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर एआई आधारित निगरानी, जैमर और मल्टीलेयर चेकिंग सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन इसके बावजूद लखीसराय में यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।

मूल परीक्षा पहले ही रद्द हो चुकी थी

3 मई 2026 को हुई NEET की मूल परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था और इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। अब री-एग्जाम में सामने आया यह सॉल्वर गैंग मामला परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक और गंभीर सवाल बनकर उभरा है।

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लखीसराय में सॉल्वर गैंग का खुलासा यह दिखाता है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा के बावजूद मानवीय और संगठित धोखाधड़ी के नए तरीके लगातार सामने आ रहे हैं। यह केवल एक जिला स्तर की घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है कि निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

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